सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 28 सितंबर 2026 को निर्दिष्ट UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अंतरिम रोक से इनकार किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्र, भारतीय रिज़र्व बैंक और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया को नोटिस दिया। लगभग चार हफ़्ते में हलफ़नामे माँगे गए: शुल्क का कानूनी और तकनीकी आधार क्या है, और कमाई किसे होती है। ढाँचा अब भी 15 अक्टूबर से लागू होना है। अंतिम फ़ैसला नहीं हुआ।

India Today, CNBC-TV18, Moneycontrol, द हिंदू, द ट्रिब्यून और न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अंतरिम रोक से इनकार की रिपोर्ट की। Hindustan Times ने केंद्र से छोटे हलफ़नामे की माँग और मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी छापी। उस पहले पाठ में रोक का आदेश दर्ज नहीं था। बाद की रिपोर्टें, जिनमें 29 सितंबर का नोट भी है जो द हिंदू, द ट्रिब्यून और न्यू इंडियन एक्सप्रेस पर है, कहती हैं कि चुनौती जारी रहते अदालत ने अंतरिम राहत नहीं दी।

रिपोर्टों के अनुसार शुल्क ₹2,000 से ऊपर के निर्दिष्ट व्यक्ति-से-व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत है। यह व्यापारी देता है, ग्राहक नहीं। ₹75,000 और उससे अधिक के भुगतानों पर सीमा ₹300 है। Hindustan Times ने यह सीमा ₹75,000 से ऊपर के लेन-देन के लिए लिखी। ₹2,000 या उससे कम के भुगतान बाहर हैं। व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफ़र किसी भी राशि पर मुफ़्त रहते हैं। ज़रूरी और कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों में एकमुश्त ₹5 है। India Today और CNBC-TV18 ने इस एकमुश्त शुल्क के लिए रेल, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि आदानों के नाम लिखे। CNBC-TV18 ने म्यूचुअल फ़ंड, प्रतिभूति, स्टॉकब्रोकर और डीलरों के लिए 0.02 प्रतिशत लिखा, वह भी अधिकतम ₹300। Hindustan Times ने ढाँचे को 14 सितंबर की वित्त मंत्रालय की अधिसूचना से जोड़ा। India Today और CNBC-TV18 के अनुसार याचिका 15 सितंबर को घोषित ढाँचे को भी चुनौती देती है।

Hindustan Times के अनुसार मुख्य न्यायाधीश ने कहा: "यह कानूनी से कम और तकनीकी मुद्दा ज़्यादा है। हमें चाहिए कि आप, केंद्र, छोटे हलफ़नामे में तथ्य रखें।" पीठ ने पूछा कि इस शुल्क के पीछे कार्यपालिका की कौन सी शक्ति है, और कहा कि अगर यह शुल्क है तो केवल कार्यकारी आदेश पर नहीं टिक सकता। जवाब आने के बाद देखा जा सकेगा कि पैसा किसके हाथ में आय है। न्यायमूर्ति बागची ने पूछा कि अगर यह न कर है न शुल्क, तो इस शुल्क का स्वरूप क्या है। गुण-दोष पर मामला आगे बढ़े, तब भी अंतरिम राहत नहीं मिली।

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने अदालत को बताया कि फ़ैसला 15 अक्टूबर से लागू होगा। उन्होंने कहा कि UPI इस्तेमाल करने वाले 96 प्रतिशत लोग छूट में हैं, और बाकी हिस्से में ज़रूरी सेवाओं पर सीमा है। केंद्र ने यह भी कहा कि लगभग 96 प्रतिशत लेन-देन छूट में रहते हैं। उन्होंने कहा कि एक रुपया भी सरकार को नहीं जाता। उन्होंने इसे बैंक और सेवा प्रदाता के बीच निपटान शुल्क बताया, जिसे NPCI आगे बढ़ाता है, और कहा कि यह न कर है न शुल्क। ये दलीलें हैं। ये फ़ैसला नहीं हैं।

जनहित याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता की है। CNBC-TV18 नाम की वर्तनी दत्ता लिखता है। Hindustan Times के अनुसार उनके साथ अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने दलील दी। याचिका 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के ढाँचे को चुनौती देती है। इसमें कथित है कि संशोधित क़ानून कार्यपालिका को बेरोक-टोक शक्ति देता है, और वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता तथा परामर्श अपर्याप्त थे। वह ₹2,000 से ऊपर के ढाँचे को रद्द या निलंबित करने को कहती है, या परामर्श और प्रभाव-अध्ययन के लिए वापस भेजने को। CNBC-TV18 ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स ऐक्ट, 2007 की संशोधित धारा 10A की चुनौती लिखी, और यह शिकायत कि RuPay डेबिट कार्ड बिना सीमा के मुफ़्त रहते हैं। उस रिपोर्ट में याचिका के आँकड़े व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफ़र को UPI मात्रा का 37 प्रतिशत और मूल्य का 70 प्रतिशत बताते हैं। ये याचिका के कथित आरोप और आँकड़े हैं।

India Today ने लिखा कि करीब छह साल की पूरी तरह मुफ़्त UPI समाप्त हुई, और उसी लेख में व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफ़र तथा छोटे भुगतान शुल्क से बाहर रखे। किसी रिपोर्ट में यह नहीं है कि अदालत ने शुल्क की क़ानूनियत तय कर दी।

आगे क्या

ढाँचा अब भी 15 अक्टूबर को आना है। अदालत ने इस तारीख पर रोक नहीं लगाई। केंद्र, रिज़र्व बैंक और NPCI से लगभग चार हफ़्ते में हलफ़नामे माँगे गए हैं। रिपोर्टें अगली सुनवाई की तारीख नहीं देतीं। गुण-दोष लंबित हैं।

मुख्य बातें

  1. सोमवार, 28 सितंबर 2026: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामला सुना।
  2. अदालत ने अंतरिम रोक नहीं लगाई। ₹2,000 से ऊपर के निर्दिष्ट व्यक्ति-से-व्यापारी UPI भुगतानों पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट अब भी 15 अक्टूबर से तय है।
  3. केंद्र, रिज़र्व बैंक और NPCI को नोटिस। कानूनी और तकनीकी आधार पर हलफ़नामे लगभग चार हफ़्ते में माँगे गए।
  4. ₹2,000 या उससे कम के भुगतान, और किसी भी राशि के व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफ़र, शुल्क से बाहर हैं। ₹75,000 और उससे अधिक पर सीमा ₹300। ज़रूरी क्षेत्रों में एकमुश्त ₹5। पूँजी-बाज़ार UPI पर 0.02%, सीमा ₹300।
  5. केंद्र ने अदालत को बताया कि यह न कर है न शुल्क, लगभग 96% छूट में हैं, और एक रुपया भी सरकार को नहीं जाता। ये केंद्र के कथन हैं।
  6. अधिवक्ता अंजन दत्ता की याचिका 14 सितंबर की अधिसूचना और 15 सितंबर के ढाँचे को चुनौती देती है। बेरोक-टोक शक्ति और सुरक्षा की कमी के दावे कथित हैं। गुण-दोष अभी लंबित हैं।

दोनों तरफ़ क्या कहा

याचिकाकर्ता

अधिवक्ता अंजन दत्ता की याचिका, जिसके साथ अधिवक्ता आशुतोष दुबे ने दलील दी, ढाँचे को रद्द करने, निलंबित करने, या परामर्श के लिए वापस भेजने को कहती है। इसमें कथित है कि संशोधित क़ानून कार्यपालिका को बेरोक-टोक शक्ति देता है, और शुल्क पर्याप्त वैधानिक सुरक्षा, पारदर्शिता तथा सार्वजनिक परामर्श के बिना है। CNBC-TV18, जो नाम दत्ता लिखता है, के अनुसार याचिका पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स ऐक्ट, 2007 की संशोधित धारा 10A को चुनौती देती है, और यह शिकायत करती है कि RuPay डेबिट कार्ड मुफ़्त रहते हैं।

केंद्र

एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमन ने कहा कि फ़ैसला 15 अक्टूबर से लागू होगा, UPI इस्तेमाल करने वाले लगभग 96 प्रतिशत लोग छूट में हैं, और बाकी में ज़रूरी सेवाओं पर सीमा है। उन्होंने कहा कि एक रुपया भी सरकार को नहीं जाता। उन्होंने शुल्क को बैंक और सेवा प्रदाता के बीच निपटान शुल्क बताया, जिसे NPCI आगे बढ़ाता है, और कहा कि यह न कर है न शुल्क। यह अदालत में केंद्र का पक्ष है। यह फ़ैसला नहीं है।

पुष्टि नहीं हुई

  • यह कि अदालत ने शुल्क को क़ानूनी या ग़ैर-क़ानूनी ठहराया। उसने अंतरिम रोक नहीं लगाई और हलफ़नामे माँगे। गुण-दोष लंबित हैं।
  • यह कि हर UPI भुगतान पर अब शुल्क है। रिपोर्टें शुल्क को ₹2,000 से ऊपर के निर्दिष्ट व्यापारी भुगतानों तक रखती हैं। व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफ़र और ₹2,000 या उससे कम के भुगतान बाहर हैं।
  • याचिका के ये दावे कि कार्यपालिका को बेरोक-टोक शक्ति मिली, या परामर्श और वैधानिक सुरक्षा नहीं थी। ये याचिका के कथित आरोप हैं।

स्रोत

  1. Hindustan Times https://www.hindustantimes.com/india-news/supreme-court-seeks-centre-response-on-plea-challenging-mdr-on-upi-payments-of-over-rs-2000-101790579572070.html · 2026-09-28 ~13:33 IST
  2. India Today https://www.indiatoday.in/india/law-news/story/upi-mdr-charge-legal-basis-who-is-earning-supreme-court-asks-government-rbi-explain-3004649-2026-09-28 · 2026-09-28 ~12:46–13:24 IST
  3. Moneycontrol https://www.moneycontrol.com/news/india/supreme-court-issues-notice-to-rbi-npci-over-upi-mdr-charges-above-rs2-000-14039899.html · 2026-09-28 ~13:06 IST
  4. CNBC-TV18 https://www.cnbctv18.com/business/finance/upi-mdr-case-supreme-court-what-is-changing-october-15-why-challenged-19999618.htm · 2026-09-28 ~13:21 IST
  5. The Hindu https://www.thehindu.com/business/Economy/if-neither-tax-nor-fee-what-is-this-expropriation-supreme-court-asks-govt-on-upi-mdr-charges/article71518779.ece · 28 सितंबर 2026, सुबह 5:30 IST
  6. The Tribune https://www.tribuneindia.com/news/india/sc-notice-to-centre-rbi-and-others-on-pil-against-mdr-on-upi-payments-above-rs-2000/ · 28 सितंबर 2026, सुबह 5:30 IST
  7. New Indian Express https://www.newindianexpress.com/india/2026/Sep/28/sc-refuses-to-stay-fee-on-upi-transactions-above-rs-2000-seeks-centres-response · 28 सितंबर 2026, सुबह 5:30 IST